प्रोफेसर की डायरी – डॉ. लक्ष्मण यादव
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- ‘प्रोफेसर की डायरी’ एक शिक्षक के जीवन-संघर्ष और अनुभवों का मार्मिक दस्तावेज़ है।
- यह पुस्तक उच्च शिक्षा संस्थानों के भीतर मौजूद सामाजिक और संस्थागत चुनौतियों को सामने लाती है।
- लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को ईमानदारी और साहस के साथ लिखा है।
- पुस्तक में शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के प्रश्न प्रमुखता से उभरते हैं।
- इसकी भाषा सरल, आत्मीय और प्रभावशाली है।
- लेखक की संवेदनशीलता हर अध्याय में दिखाई देती है।
- यह केवल आत्मकथा नहीं, बल्कि हमारे समय का सामाजिक दस्तावेज़ भी है।
- पाठक लेखक के संघर्ष, उम्मीद और प्रतिबद्धता से जुड़ाव महसूस करता है।
- पुस्तक शिक्षा व्यवस्था के अनेक अनदेखे पहलुओं पर सोचने को मजबूर करती है।
- इसमें व्यवस्था और व्यक्ति के बीच के संघर्ष का सजीव चित्रण है।
- लेखक कहीं भी अनावश्यक कटुता नहीं अपनाते, बल्कि अनुभवों को तथ्यात्मक ढंग से रखते हैं।
- यह युवाओं, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए विशेष रूप से प्रेरक पुस्तक है।
- पुस्तक सामाजिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों के प्रति विश्वास को मजबूत करती है।
- इसे पढ़ते हुए पाठक शिक्षा और समाज के संबंधों को नए दृष्टिकोण से देखता है।
- समकालीन भारतीय शिक्षा और सामाजिक न्याय को समझने के लिए यह एक अत्यंत पठनीय कृति है।
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